UPI MDR: ₹2000+ पर 0.4% — FM सीतारमण की सफाई

पहले जान लें ये जरूरी बातें

₹1 लाख तक के कलेक्शन पर पूरी छूट — जो छोटे व्यापारी हर महीने UPI क्यूआर कोड से ₹1 लाख तक का कलेक्शन करते हैं, उन्हें यह शुल्क बिल्कुल नहीं देना होगा

96% लेनदेन पूरी तरह अप्रभावित — वित्त मंत्रालय के मुताबिक ज्यादातर आम लोगों के रोजमर्रा के UPI पेमेंट पर कोई असर नहीं पड़ेगा

₹2,000 से कम का हर पेमेंट फ्री — चाहे मर्चेंट को करें या किसी व्यक्ति को, इससे कम राशि पर कोई चार्ज नहीं

मेडिकल-हॉस्पिटल ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगेगा या नहीं? — सरकार ने रेलवे, टेलिकॉम, फ्यूल और इंश्योरेंस को फ्लैट ₹5 शुल्क वाली विशेष सूची में रखा है; हॉस्पिटल या मेडिकल सेवाओं का इसमें अलग से जिक्र नहीं है, यानी ये सामान्य मर्चेंट श्रेणी में ही आएंगी और ₹2,000 से ऊपर के भुगतान पर सामान्य 0.4% MDR नियम लागू होगा (जब तक व्यापारी ₹1 लाख/माह छूट सीमा में न आए)

यह टैक्स नहीं है — वित्त मंत्री ने खुद साफ किया कि यह कोई टैक्स, सेस या सरचार्ज नहीं है और पैसा सरकारी खजाने में नहीं जाएगा

बोझ ग्राहक पर नहीं, व्यापारी पर — शुल्क बैंकों, पेमेंट गेटवे और UPI ऐप के बीच बंटेगा, ग्राहकों की जेब से नहीं कटेगा

अब जानते हैं पूरी खबर विस्तार से।

देश में डिजिटल पेमेंट को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि UPI लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) कोई टैक्स नहीं है और इसका बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा। यह नया शुल्क 15 अक्टूबर से लागू होने जा रहा है, जिसे लेकर राजनीतिक हलकों में काफी हंगामा मचा हुआ था।

पीटीआई से बातचीत में सीतारमण ने कहा, “यह न तो टैक्स है, न सेस है, और न ही सरचार्ज। इससे होने वाली कमाई भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) में नहीं जाएगी।” उन्होंने बताया कि यह शुल्क व्यापारियों द्वारा वहन किया जाएगा और इसे पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल बैंकों, पेमेंट गेटवे और UPI ऐप प्रदाताओं के बीच बांटा जाएगा।

कैसे काम करेगा यह चार्ज

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा 15 सितंबर को घोषित फ्रेमवर्क के अनुसार, ₹2,000 से अधिक के विशिष्ट पर्सन-टू-मर्चेंट UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) ट्रांसफर और ₹2,000 या उससे कम के मर्चेंट पेमेंट पूरी तरह मुफ्त बने रहेंगे। ₹75,000 और उससे अधिक के लेनदेन पर यह शुल्क अधिकतम ₹300 तक सीमित रहेगा।

शुल्क का बंटवारा कैसे होगा

MDR से जो भी राशि इकट्ठा होगी, उसका वितरण इस प्रकार होगा:

40 प्रतिशत — ग्राहक के बैंक को

30 प्रतिशत — पेमेंट गेटवे को

20 प्रतिशत — UPI ऐप को

10 प्रतिशत — ऐप की स्पॉन्सरिंग बैंक को

रेलवे, टेलिकॉम, ईंधन और बीमा जैसी आवश्यक सेवाओं पर प्रति पात्र लेनदेन फ्लैट ₹5 शुल्क लगेगा, जबकि कैपिटल मार्केट लेनदेन पर कम दर यानी 0.02 प्रतिशत शुल्क लगेगा, जो अधिकतम ₹300 तक सीमित होगा।

किन व्यापारियों को मिलेगी छूट

UPI क्यूआर कोड के जरिए हर महीने ₹1 लाख तक का कलेक्शन करने वाले छोटे व्यापारियों को इस शुल्क से पूरी तरह छूट दी गई है। वित्त मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक, लगभग 96 प्रतिशत पर्सन-टू-मर्चेंट UPI लेनदेन इस नए नियम से प्रभावित नहीं होंगे, यानी आम उपभोक्ताओं की बड़ी संख्या पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

विपक्ष के आरोपों को किया खारिज

सीतारमण ने विपक्ष के उन आरोपों को सिरे से खारिज किया जिनमें कहा गया था कि यह फैसला बाहरी दबाव में, खासकर अमेरिका के दबाव में लिया गया है। उन्होंने इन आरोपों को “पूरी तरह निराधार” बताया और स्पष्ट किया कि यह फ्रेमवर्क NPCI, पेमेंट बैंकों और मर्चेंट बैंकों द्वारा संयुक्त रूप से लिया गया एक पेशेवर फैसला है।

NPCI के प्रबंध निदेशक दिलीप अस्बे ने हाल ही में एक बैंकिंग सम्मेलन में कहा कि ग्राहकों पर वास्तविक चार्ज पड़ने का जोखिम कुल MDR वैल्यू के केवल लगभग 10 प्रतिशत हिस्से पर लागू होता है, क्योंकि लगभग 80 प्रतिशत कलेक्शन बड़े कारोबारियों से आएगा जो पहले से ही क्रेडिट कार्ड लेनदेन पर ज्यादा फीस दे रहे हैं। वित्त मंत्रालय ने कहा है कि वह इंडियन बैंक्स एसोसिएशन और व्यापारी संगठनों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करेगा कि यह शुल्क ग्राहकों पर न डाला जाए।

छोटे व्यापारियों के लिए विशेष फंड

MDR से इकट्ठा होने वाली कुल राशि का 5 प्रतिशत हिस्सा एक विशेष फंड में जाएगा, जिसका उद्देश्य छोटे व्यापारियों के बीच UPI की पहुंच बढ़ाना है। बता दें कि NPCI के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 में UPI के जरिए 2,451 करोड़ (24.51 अरब) लेनदेन हुए, जिनकी कुल कीमत ₹29.82 लाख करोड़ रही।

निष्कर्ष

सरकार का कहना है कि यह नया MDR ढांचा आम उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ डाले बिना डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए बनाया गया है। हालांकि 15 अक्टूबर से लागू होने वाले इस नियम को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है, लेकिन सरकार का जोर इस बात पर है कि 96 प्रतिशत लेनदेन पूरी तरह अप्रभावित रहेंगे और असली बोझ बड़े व्यापारियों पर ही पड़ेगा।

नोट: हॉस्पिटल/मेडिकल ट्रांजैक्शन को लेकर सरकार की तरफ से कोई अलग स्पष्टीकरण अब तक जारी नहीं हुआ है — ऊपर दिया गया जवाब मौजूदा जानकारी के आधार पर एक अनुमान है, आधिकारिक पुष्टि की प्रतीक्षा है।

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